रविवार, 28 अप्रैल 2013

जब तुम आओगे
भूल जाऊँगी
धुंआ, उदासी
खालीपन
तुम सिर्फ याद न आना
कभी सच में भी
आ जाना
भक्ति, आराधना
व प्रेम से
एक दिन सब पिघल जाएगा


5 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है
    जीवन के मर्म को छूती
    प्रेम का महीन अहसास कराती रचना
    बधाई


    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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  2. बहुत सुन्दर भाव.....

    लिखते रहिये...ढेर सारी शुभकामनाएं.

    अनु

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